ग़ज़ल गुलदस्ता 1.) आज से दिल ये यारा तुम्हारा हुआ । भूल जाएंगे जो भी तमाशा हुआ ।। दे दिया दिल तुम्हें इक नज़र में सनम । सोचना मत ये कोई अजूबा हुआ ।। मेरी तारीफ़ करना किसी और से । प्यार करने का ये क्या तरीक़ा हुआ ।। रोककर एक दिन उसने कह ही दिया । चाँद लगता जमी पर है उतरा हुआ ।। आप इतनी हिफाज़त किया मत करो । हम हुऐ या कोई फिर ख़ज़ाना हुआ ।। रंज हमको रहेगा इसी बात का । क्यो न समझे कहाँ पानी ठहरा हुआ ।। मुझको आग़ोश में लेना मुश्किल बहुत । टूटकर है बहुत साथी बिखरा हुआ ।। 2.) अपना कोई छलता है । दिल अन्दर से जलता है ।। प्यार गवाही जब माँगें । रिश्ता वो कम चलता है ।। पत्थर भी पिघला करते । इन्सा कहाँ पिघलता है ।। उम्र छुपाना है मुश्किल । मौत गणित जब चलता है ।। जंगल में जब आग लगे । कोई न कोई जलता...
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