मुहब्बत
मुक्तक
1.
ये मुहब्बत तो पुरानी है नया नाम न दो ।
इक इशारा ही बहुत अब कोई पैगाम न दो ।।
आपने ही त़ो छुपाये थे किताबों में खत ।
हम पे तुम कोई भी इल्ज़ाम सरेआम न दो ।।
2.
प्रेम विश्वास डोर होता है ।
न कोई ओर छोर होता है ।।
सौप जीवन दिया जो कान्हा को ।
मन पे फिर किसका ज़ोर होता है ।
3.
है बात कोई उसमें , जो दिल को लुभाती है ।
जब बात करे हँसकर , कलियाँ भी लजाती है ।।
उपहास उड़ाना भी , उपहार सा है लागे ।
तुम दूर रहो *साथी* , सुख चैन उड़ाती है।।
4.
प्यार के बदले में बस प्यार किया जाता है ।
दिल के बदले में तो बस दिल ही दिया जाता है ।।
प्रेम उपहार समझ ले तू ख़ुदा का साथी।
प्रेम में जह्र मिले वो भी पिया जाता है ।।
5.
संकट आये है जाऐंगे ,
एक यही अहसास रखो ।
हिम्मत की पतवार हमेंशाँ ,
अपने मन के पास रखो ।।
जीवन रूपी इस दरिया में ,
अपनी नाव उतारो तो ।
पार उतर जाओगे साथी,
मन में दृढ़ विश्वास रखो ।।
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