गीत- (1)
ज़िंदगी एक समंदर के जैसी ,
इसमें तूफ़ान आते रहेंगे ।
हौसलो की तू पतवार रखना ,
वरना गम ये डुबाते रहेंगे ।।
आँसुओं का रहा काम बहना ,
दिल का है काम हर गम को सहना ।
हर अधेंरे को मैं चीरती हूँ ,
एक उजली किरण का है कहना ।।
कर तू उम्मीद का दीप रोशन ,
वरना दुख ये सताते रहेंगे ।
ज़िंदगी इक समंदर....................
व़क्त रहता नही एक सा है ,
बात इतनी सभी जानते हो ।
मौत का व़क्त रहता मुक़र्रर ,
रार जीवन से क्यों ठानते हो ।।
जो मिला है उसी जी ख़ुशी से ,
लोग दिल तो दुखाते रहेंगे ।
ज़िंदगी इक समंदर..................
पत्थरों के शहर में भी देखो ,
इक नदी हार कब मानती है ।
जो मिला उसको उसने ही लूटा ,
वो तजुर्बे से पहचानती है ।।
दूसरो की मदद ले न साथी ,
लोग हरदम जताते रहेंगे ।
ज़िंदगी इक समंदर ...........
गीत- (2)
जिंदगी की हँसीं वादियाँ छ़ोडकर ,
हम किधर जाएंगे हम किधर जाएगे ।
साथ तेरा मिला जिंदगी में अगर ,
मौसमों की तरह हम निखर जाएंगे ।।
धूप गम की कभी तुम पे आये अगर ,
बनके बादल उसे रोक सकता हूँ मैं ।
कोई तोहमत लगाये मेरे प्यार पर ,
चाहे कोई भी हो टोक सकता हूँ मैं ।।
ले लो आगोश में हम हवा की तरह ,
आज हम है इधर कल उधर जाएंगे ।
*जिन्दगी की हँसीं.............।।*
तेरी कारीगरी को हम जानते ,
तुमने पत्थर तराशे बने देवता ।
क्या बदल पाये तुम अपने दिल को कभी ,
आपको हम सदाँ मानते देवता ।।
भींगकर आँसूओं में वो बुत कह रहे ,
दूर जाओ नही घुँट के मर जाएंगे ।
*जिन्दगी की हँसीं...........।।*
एक लम्हा हमें चाहिए आपका ,
हम समंदर रखते नही वास्ता ।
आप दे दो खुशी लहर इक हमें ,
हम बना लेंगे खुद प्यार का रास्ता ।।
जिंदगी के न बदलें अगर मायनें ,
सारे रस्ते वही पर ठहर जाएंगे ।
जिंदगी की हँसीं.........................।।
नज़्म (3)
बहुत खास लगती हो तुम ।
बहुत खास लगती हो तुम ।।
वो सुन्दर सा चेहरा , घनी जुल्फ उस पर , करती है पेहरा ।
वो होठो की लाली , अल्हण सी लगती , है कानो की बाली ।।
ये आँखो का काजल , संभालो हमें अब , करे खूब पागल ।
छुपा भी न सकते , बता भी न सकते ।।
एक अहसास लगती हो तुम ।
*बहुत खास लगती हो तुम ...*
वो कलियों सा खिलना , हमें याद आता , वो हँसकर के मिलना ।
वो पाकीजा मूरत , नही भूल सकते , हसीन उसकी सूरत ।।
उन फूलो की शामत , तितली के जैसी , है उसकी कयामत ।
भले दूर रहती , भले कुछ न कहती ।।
फिर भी आभास लगती हो तुम ।
*बहुत खास लगती हो तुम* ।।
खिले वो कमल सी , पढो़ ख्व़ाब उसके , लगे वो ग़ज़ल सी ।
वो खुशियों की प्याली , हमेंशा बिखेरे , छटां ही निराली ।।
वो गंगा सी पावन , अमर भी अजर भी , है उसका यौवन ।
अगर वो न मिलते , क्या गुल ये खिलते ।।
एक विश्वास लगती हो तुम ।
*बहुत खास लगती हो तुम ।।*
गीत- (4)
देख सवरिया राधा कैसी ,
प्रीत अनोखी करती है ।
छोड़ के दर्पण राधा तेरी ,
रख तस़्वीर सवरती है ।।
कान्हा सा निर्मोही दूजा ,
देखा और नही जग में ।
कैसे रहता हैं राधा बिन ,
रहती हैं जो रग रग में ।।
सोच सोचकर राधा रानी ,
मन मन आहें भरती है ।
*देख सवरिया राधा कैसी.....*
राधा रानी जी का देखो ,
चंदा जैसा मुखड़ा है ।
श्याम बिना राधा का मुखड़ा ,
दिखता उखड़ा उखड़ा है ।।
कृष्ण विरह में राधा रानी ,
पल पल रोज बिखरती है ।।
*देख सवरिया राधा रानी.......*
दिल के अहसासों को दिल में ,
जो रखकर के जीता है ।
दर्द समझता है केवल जो ,
गम के आँसू पीता है ।।
सबको चाहे हमें रुलाऐ ,
साथी बात अखरती है ।
देख सवरिया राधा रानी....... ।।
गीत- (5)
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान , हमारा प्यारा हिन्दुस्तान ।
लहर लहर लहराऐ तिरंगा , भारत की हैं शान ।।
सरयू यमुना कृष्णा कावेरी , ब्रह्मपुत्र की प्रीति घनेरी ।
अमृतपान कराती गंगा , अंधकार में करे उजेरी ।।
पल पल धरती करती सिचिंत , ये भारत की जान ।
*हमारा प्यारा हिन्दुस्तान.........*
काश्मीर से कन्याकुमारी , अटक से लेकर कटक हमारी ।
पूर्व से पश्चिम तक देखो , भारत की है छटा निराली ।।
उत्तर मे जो खड़ा हिमालय बनकर के चट्टान ।
*हमारा प्यारा हिन्दुस्तान.........*
सूर कबीरा मीराबाई , नानक तुलसी बाबा साँई ।
हुऐ विवकानंद से ज्ञानी, लिख दी उनने अमर कहानी ।।
भारत भूमि तो हरदम ही , हैं गुणियो की खान ।
*हमारा प्यारा ............................।.
बहुत ही शानदार पन्तियाँ
जवाब देंहटाएंमन खुश हो गया पढ़कर
सर जी
धन्यवाद
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय आपका🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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